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वाल्मीकि रामायण 88.19

कथम् इन्दीवर श्यामो रक्त अक्षः प्रिय दर्शनः ।
सुख भागी च दुह्ख अर्हः शयितो भुवि राघवः ॥२-८८-१९॥

पूरा अध्याय