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वाल्मीकि रामायण 88.18

सार्वभौम कुले जातः सर्व लोक सुख आवहः ।
सर्व लोक प्रियः त्यक्त्वा राज्यम् प्रियम् अनुत्तमम् ॥२-८८-१८॥

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