ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 8585.20वाल्मीकि रामायण 85.20प्रमोह अनन्त सत्त्वेन सम्ताप ओषधि वेणुना । आक्रान्तः दुह्ख शैलेन महता कैकयी सुतः ॥२-८५-२०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय