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वाल्मीकि रामायण 85.19

ध्यान निर्दर शैलेन विनिह्श्वसित धातुना ।
दैन्य पादप सम्घेन शोक आयास अधिशृन्गिणा ॥२-८५-१९॥

पूरा अध्याय