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वाल्मीकि रामायण 83.3

नव नाग सहस्राणि कल्पितानि यथा विधि ।
अन्वयुर् भरतम् यान्तम् इक्ष्वाकु कुल नन्दनम् ॥२-८३-३॥

पूरा अध्याय