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वाल्मीकि रामायण 82.14

अनार्य जुष्टम् अस्वर्ग्यम् कुर्याम् पापम् अहम् यदि ।
इक्ष्वाकूणाम् अहम् लोके भवेयम् कुल पाम्सनः ॥२-८२-१४॥

पूरा अध्याय