ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 8181.10वाल्मीकि रामायण 81.10शात कुम्भमयीम् रम्याम् मणि रत्न समाकुलाम् । सुधर्माम् इव धर्म आत्मा सगणः प्रत्यपद्यत ॥२-८१-१०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय