ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 88.25वाल्मीकि रामायण 8.25असावत्यन्तनिर्भग्न स्तवपुत्रो भविष्यति । अनाथवत्सुखेभ्यश्च राजवंशाच्च वत्सले ॥२-८-२५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय