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वाल्मीकि रामायण 8.25

असावत्यन्तनिर्भग्न स्तवपुत्रो भविष्यति ।
अनाथवत्सुखेभ्यश्च राजवंशाच्च वत्सले ॥२-८-२५॥

पूरा अध्याय