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वाल्मीकि रामायण 77.23

सावशेषास्थिनिचये किमिह त्वम् विलम्बसे ।
त्रीणि द्वन्द्वानि भूतेषु प्रवृत्तानि अविशेषतः ॥२-७७-२३॥

पूरा अध्याय