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वाल्मीकि रामायण 77.22

वसिष्ठो भरतम् वाक्यम् उत्थाप्य तम् उवाच ह ।
त्रयोदशोऽयम् दिवसः पितुर्वृत्तस्य ते विभो ॥२-७७-२२॥

पूरा अध्याय