Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 72.3

स प्रविश्य एव धर्म आत्मा स्व गृहम् श्री विवर्जितम् ।
भरतः प्रेक्ष्य जग्राह जनन्याः चरणौ शुभौ ॥२-७२-३॥

पूरा अध्याय