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वाल्मीकि रामायण 72.26

स रुदत्या चिरम् कालम् भूमौ विपरिवृत्य च ।
जननीम् प्रत्युवाच इदम् शोकैः बहुभिर् आवृतः ॥२-७२-२६॥

पूरा अध्याय