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वाल्मीकि रामायण 72.21

बाष्पमुत्सृज्य कण्ठे स्वात्मना परिपीडितः ।
आच्चाद्य वदनम् श्रीमद्वस्त्रेण जयताम् वरः ॥२-७२-२१॥

पूरा अध्याय