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वाल्मीकि रामायण 67.8

इक्ष्वाकूणाम् इह अद्य एव कश्चित् राजा विधीयताम् ।
अराजकम् हि नो राष्ट्रम् न विनाशम् अवाप्नुयात् ॥२-६७-८॥

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