ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 6666.5वाल्मीकि रामायण 66.5भर्तारम् तम् परित्यज्य का स्त्री दैवतम् आत्मनः । इच्चेज् जीवितुम् अन्यत्र कैकेय्याः त्यक्त धर्मणः ॥२-६६-५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय