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वाल्मीकि रामायण 66.24

निशा नक्षत्र हीना इव स्त्री इव भर्तृ विवर्जिता ।
पुरी न अराजत अयोध्या हीना राज्ञा महात्मना ॥२-६६-२४॥

पूरा अध्याय