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वाल्मीकि रामायण 64.34

को माम् सम्ध्याम् उपास्य एव स्नात्वा हुत हुत अशनः ।
श्लाघयिष्यति उपासीनः पुत्र शोक भय अर्दितम् ॥२-६४-३४॥

पूरा अध्याय