Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 62.9

सा त्वम् धर्म परा नित्यम् दृष्ट लोक पर अवर ।
न अर्हसे विप्रियम् वक्तुम् दुह्खिता अपि सुदुह्खितम् ॥२-६२-९॥

पूरा अध्याय