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वाल्मीकि रामायण 62.8

भर्ता तु खलु नारीणाम् गुणवान् निर्गुणो अपि वा ।
धर्मम् विमृशमानानाम् प्रत्यक्षम् देवि दैवतम् ॥२-६२-८॥

पूरा अध्याय