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वाल्मीकि रामायण 61.8

पद्म वर्णम् सुकेश अन्तम् पद्म निह्श्वासम् उत्तमम् ।
कदा द्रक्ष्यामि रामस्य वदनम् पुष्कर ईक्षणम् ॥२-६१-८॥

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