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वाल्मीकि रामायण 59.26

अतः नु किम् दुह्खतरम् यो अहम् इक्ष्वाकु नन्दनम् ।
इमाम् अवस्थाम् आपन्नो न इह पश्यामि राघवम् ॥२-५९-२६॥

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