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वाल्मीकि रामायण 57.32

सा तथा उक्त्वा महा राजम् कौसल्या शोक लालसा ।
धरण्याम् निपपात आशु बाष्प विप्लुत भाषिणी ॥२-५७-३२॥

पूरा अध्याय