ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 5454.32वाल्मीकि रामायण 54.32प्रविविक्तम् अहम् मन्ये तम् वासम् भवतः सुखम् । इह वा वन वासाय वस राम मया सह ॥२-५४-३२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय