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वाल्मीकि रामायण 51.21

रम्य चत्वर सम्स्थानाम् सुविभक्त महा पथाम् ।
हर्म्य प्रसाद सम्पन्नाम् गणिका वर शोभिताम् ॥२-५१-२१॥

पूरा अध्याय