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वाल्मीकि रामायण 50.18

देवसम्घाप्लुतजलाम् निर्मलोत्पलशोभिताम् ।
क्वचिदाभोगपुलिनाम् क्वचिन्नर्मलवालुकाम् ॥२-५०-१८॥

पूरा अध्याय