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वाल्मीकि रामायण 50.17

क्वचित्स्तिमितगम्भीराम् क्वचिद्वेगजलाकुलाम् ।
क्वचिद्गम्भीरनिर्घोषाम् क्वचिद्भैरवनिस्वनाम् ॥२-५०-१७॥

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