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वाल्मीकि रामायण 49.10

ततः वेद श्रुतिम् नाम शिव वारि वहाम् नदीम् ।
उत्तीर्य अभिमुखः प्रायात् अगस्त्य अध्युषिताम् दिशम् ॥२-४९-१०॥

पूरा अध्याय