ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 4848.35वाल्मीकि रामायण 48.35उपशान्तवणिक्पण्या नष्टहर्षा निराश्रया । अयोध्या नगरी चासीन्नष्टतारमिवाम्बरम् ॥२-४८-३५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय