ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 4747.17वाल्मीकि रामायण 47.17एषा रामेण नगरी रहिता नातिशोभते । आपगा गरुडेनेव ह्रदादुद्धृतपन्नगा ॥२-४७-१७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय