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वाल्मीकि रामायण 43.11

कदा प्रेक्ष्य नर व्याघ्राव् अरण्यात् पुनर् आगतौ ।
नन्दिष्यति पुरी हृष्टा समुद्रैव पर्वणि ॥२-४३-११॥

पूरा अध्याय