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वाल्मीकि रामायण 43.10

श्रुत्वा एव उपस्थितौ वीरौ कदा अयोध्या भविष्यति ।
यशस्विनी हृष्ट जना सूच्च्रित ध्वज मालिनी ॥२-४३-१०॥

पूरा अध्याय