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वाल्मीकि रामायण 40.5

सृष्टः त्वम् वन वासाय स्वनुरक्तः सुहृज् जने ।
रामे प्रमादम् मा कार्षीः पुत्र भ्रातरि गच्चति ॥२-४०-५॥

पूरा अध्याय