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वाल्मीकि रामायण 40.4

तम् वन्दमानम् रुदती माता सौमित्रिम् अब्रवीत् ।
हित कामा महा बाहुम् मूर्ध्नि उपाघ्राय लक्ष्मणम् ॥२-४०-४॥

पूरा अध्याय