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वाल्मीकि रामायण 40.34

रुदिताश्रुपरिद्यूनम् हाहाकृतमचेतनम् ।
प्रयाणे राघवस्यासीत्पुरम् परमपीडितम् ॥२-४०-३४॥

पूरा अध्याय