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वाल्मीकि रामायण 40.33

निर्गच्छति महाबाहौ रामे पौरजनाश्रुभिः ।
पतितैरभ्यवहितम् प्रशशाम महीरजः ॥२-४०-३३॥

पूरा अध्याय