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वाल्मीकि रामायण 35.30

मा त्वम् प्रोत्साहिता पापैर्देवराजसमप्रभम् ।
भर्तारम् लोकभर्तारमसद्धर्ममुपादधाः ॥२-३५-३०॥

पूरा अध्याय