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वाल्मीकि रामायण 35.29

नैवम् भव Gऋहाणेदम् यदाह वसुधाधिपः ।
भर्तुरिच्चामुपास्वेह जनस्यास्य गतिर्भव ॥२-३५-२९॥

पूरा अध्याय