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वाल्मीकि रामायण 34.51

मा चोत्कण्थां कृथा देव वने रम्स्यामहे वयम् ।
प्रशान्तहरिणाकीर्णे नानाशकुनिनादिते ॥२-३४-५१॥

पूरा अध्याय