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वाल्मीकि रामायण 34.50

अर्थितो ह्यस्मि कैकेय्या वनम् गच्छेति राघव ।
मया चोक्तं प्रजामीति तत्सत्यमनुपालये ॥२-३४-५०॥

पूरा अध्याय