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वाल्मीकि रामायण 31.30

स सुहृज् जनम् आमन्त्र्य वन वासाय निश्चितः ।
इष्क्वाकु गुरुम् आमन्त्र्य जग्राह आयुधम् उत्तमम् ॥२-३१-३०॥

पूरा अध्याय