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वाल्मीकि रामायण 25.42

पश्यामि त्वाम् सुखम् वत्स सुस्थितम् राज वेश्मनि ।
प्रणष्टकुःखसम्कल्पा हर्षविद्योतितानना ॥२-२५-४२॥

पूरा अध्याय