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वाल्मीकि रामायण 24.25

भर्तारम् न अनुवर्तेत सा च पाप गतिर् भवेत् ।
भर्तुः शुश्रूषया नारी लभते स्वर्गमु त्तमम् ॥२-२४-२५॥

पूरा अध्याय