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वाल्मीकि रामायण 23.34

खड्ग धारा हता मे अद्य दीप्यमानाइव अद्रयः ।
पतिष्यन्ति द्विपा भूमौ मेघाइव सविद्युतः ॥२-२३-३४॥

पूरा अध्याय