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वाल्मीकि रामायण 23.27

स चेद् राजनि अनेक अग्रे राज्य विभ्रम शन्कया ।
न एवम् इच्चसि धर्मात्मन् राज्यम् राम त्वम् आत्मनि ॥२-२३-२७॥

पूरा अध्याय