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वाल्मीकि रामायण 22.5

सौमित्रे यो अभिषेक अर्थे मम सम्भार सम्भ्रमः ।
अभिषेक निवृत्ति अर्थे सो अस्तु सम्भार सम्भ्रमः ॥२-२२-५॥

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