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वाल्मीकि रामायण 21.59

सवै न शक्नोमि पितुः प्रतिज्ञा ।
मिमामकर्तुम् सकलम् यथावत् ।स ह्यवयोस्तत गुरुर्नियोगे ।देवाश्च भर्ता स गतिस्स धर्मः ॥२-२१-५९॥

पूरा अध्याय