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वाल्मीकि रामायण 21.49

अम्ब सम्हृत्य सम्भारान् दुःखम् हृदि निगृह्य च ।
वनवासकृता बुद्धिर्मम धर्म्यानुवर्त्यताम् ॥२-२१-४९॥

पूरा अध्याय