Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 21.22

धर्मज्ञ यदि धर्मिष्ठो धर्मम् चरितुम् इच्चसि ।
शुश्रूष माम् इहस्थः त्वम् चर धर्मम् अनुत्तमम् ॥२-२१-२२॥

पूरा अध्याय