ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 2121.17वाल्मीकि रामायण 21.17दीप्तम् अग्निम् अरण्यम् वा यदि रामः प्रवेक्ष्यते । प्रविष्टम् तत्र माम् देवि त्वम् पूर्वम् अवधारय ॥२-२१-१७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय