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वाल्मीकि रामायण 16.36

खड्गचापधराः शूरा जग्मुराशम्सवो जनाः ।
ततो वादित्रशब्दाश्च स्तुतिशब्दाश्च वन्दिनाम् ॥२-१६-३६॥

पूरा अध्याय